Home स्थापत्य- झाँसी रेलवे-स्टेशन, झाँसी

रेलवे-स्टेशन, झाँसी

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चित्र व आलेख- विकास वैभव

Railway Station, Jhansi (U.P.)- भारत पर शासन करने की दृष्टि से लंदन की संसद ने 1 अगस्त, 1849 को दी ग्रेट इण्डियन पेन्निसुला गारेन्टेड रेलवे कम्पनी का गठन कर लिया। जब लार्ड डफलिन (1884-88) भारत में वायसराय थे तो वे इंग्लैण्ड की महारानी विक्टोरिया की ताजपोशी की स्वर्ण जयन्ति के अवसर पर भारतवासियों को बम्बई से दिल्ली तक रेलगाड़ी का अनूठा उपहार देना चाहते थे। इसी के अन्तर्गत झाँसी व इसके आसपास रेलवे लाईन बिछाने के लिए 1885 ई. में इण्डियन मिडलैण्ड रेलवे कम्पनी का गठन किया गया। इसके लिए 2 अक्टूबर, 1885 को सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फाॅर इण्डिया और इण्डियन मिडलैण्ड रेलवे के बीच एक 25 वर्षीय समझौता हुआ था। झाँसी-कानपुर, झाँसी-मानिकपुर, तथा झाँसी-ग्वालियर रेल लाइनें इण्डियन मिडलैण्ड रेलवे कम्पनी के अधीन बनी थी। झाँसी के रेलवे वर्कशाप का निर्माण भी इण्डियन मिडलैण्ड रेलवे कम्पनी ने ही किया था।

झाँसी-कानपुर खण्ड (135.4 मील) 1 फरवरी, 1888 ई. में और भोपाल खण्ड (180.4 मील) 1 जनवरी, 1889 ई. में, झाँसी-ग्वालियर खण्ड (60.3 मील) 1 मार्च, 1889 ई. में और झाँसी-मानिकपुर खण्ड (180.8 मील) 1 अगस्त, 1889 ई. में यातायात के लिए खोल दिया गया था। झाँसी रेलवे स्टेशन की इमारत हेतु मिलिट्री सिविल प्रशासन के प्रतिनिधियों द्वारा जुलाई, 1886 ई. में इस स्थान का चयन व अधिग्रहण कर निर्माण प्रारम्भ हुआ। तत्पश्चात झाँसी रेलवे-स्टेशन का उद्घाटन 1 जनवरी, 1889 ई. को हुआ था, और इस तरह झाँसी में रेलगाड़ी का आगमन हो गया। उस समय हर ओर एक-दो पैसेंजर ट्रेन चलती थीं। रेल यातायात को रफ्तार पंजाब ने दी, यह पहली एक्सप्रेस ट्रेन थी, इसके बाद जी.टी.एक्सप्रेस चली। तब ट्रेनों के डिब्बे लकङी के हुआ करते थे। आज झाँसी रेलवे-स्टेशन से हर रूट के लिए सैकड़ों ट्रेनें दौङ रहीं हैं।

सन् 1825 ई. में राजा रामचन्द्र राव ने अंग्रेजों से संधि कर शहर के परकोटे के बाहर की जमीन विकसित करने के लिए अंग्रेजों को दे दी थी। झाँसी रेलवे-स्टेशन की इमारत पहले किले के पास बनाई गई थी, जिसका बाद में तहसील के लिए प्रयोग किया गया। रेलवे लाईन जिन रियायतों से होकर गुजरी, उन रियायतों को अपने क्षेत्र में होने वाले व्यय का भुगतान अंग्रेज सरकार को करना पङा। झाँसी-कानपुर रेल लाईन पहले गढ़मऊ तक ही थी। यात्री झाँसी से कानपुर तक का टिकट लेकर, ताॅगे द्वारा गढ़मऊ पहुँच कर ट्रेन पकङता था। वही स्थिति कानपुर से झाँसी आने पर थी।

निकट के दर्शनीय स्थल- झाँसी दुर्ग, राजकीय संग्रहालय, सेन्ट ज्यूड्स चर्च व डी.आर.एम.आफिस आदि।

2 COMMENTS

  1. बहुत उपयोगी जानकारी और संक्षिप्त विवरण
    अति सुंदर लेख है

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