झिंझिया (ढिरिया)

चित्र व आलेख- पूर्णिमा सिंह Jhinjhiya (Dhiriya)- शरदीय नवरात्र में अष्टमी से पूर्णिमा की रात्री तक झिंझिया का उत्सव मनाया जाता है। मटकी में अनेक...

लोक कवि ईसुरी की फागें

आलेख- विकास वैभव बुन्देलखण्ड की फागें वसंत ऋतु (फाल्गुन माह) में गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीत हैं, जो ढोलक, मंजीरा और टहुका के साथ उल्लास,...

बुन्देली राई नृत्य

पेन्टिंग व आलेख- विकास वैभव Bundeli Rai Dance- यह नृत्य बेड़नियों द्वारा सम्पन्न वर्ग को रिझाने के लिये किया जाता है। नर्तकी नौकली का...
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