चित्र व आलेख- पूर्णिमा सिंह
हलछट, जिसे हरछट या हल षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद कृष्णपक्ष षष्ठी को महायोगी श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम के जन्मोत्सव के रूप में पुत्रवती स्त्रियाॅं इसे मनाती हैं। यह व्रत स्त्रियां अपनी संतान की लम्बी आयु और सुख-समृद्धि के लिये रखती हैं। इस पर्व पर एक भित्ति चित्र बनाया जाता है। घर के आंगन में स्त्रियां झरवेरी, कांश व पलाश की एक एक टहनी बांध कर थोड़ी सी मिट्टी में लगा देती हैं। सतनजा का पूजन भी किया जाता है।

इस दिन हल से जुती हुई भूमि पर नहीं चलना चाहिये और इस व्रत में जमीन का बोया-जोता अनाज व गाय का घी, दूध आदि नहीं खाना चाहिये। इस व्रत में फल व बिना बोया अनाज आदि खाने का रिवाज है।

आज दिन शेषनाग लये अवतार,
अरे भैया विष्णु जी के कारज संभार। आज दिन……..
शेषनाग जू बड़े बलशाली, दुश्मन को देवै पछार। आज दिन……..
जौ बल देवा काॅ से लाये ,करत हो सब को उद्धार। आज दिन……..
जौ बल भैंस दुधवा से पायो, और खेलत हैं सिंह पछार। आज दिन………
जेठे हो के रये श्याम सखा, श्याम संग करी लीला विस्तार। आज दिन………
श्याम सुन्दर संग सब जग जाये,छाया बन के साथ निभाये। आज दिन……..





























































