Home अतुल्य भारत नैनादेवी मन्दिर, नैनीताल, (उत्तराखण्ड)

नैनादेवी मन्दिर, नैनीताल, (उत्तराखण्ड)

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चित्र व आलेख- विकास वैभव

Naina Devi Temple, Nainital (Uttarakhand)- नैनीताल में नैनी झील के उत्तरी किनारे पर नैना देवी मन्दिर स्थित है। यह मन्दिर नैनीताल बस स्टैण्ड से 2 किमी की दूरी पर है। यहाॅं सती के शक्ति रूप की पूजा की जाती है। मन्दिर में दो नेत्र हैं, जो नैना देवी को दर्शाते हैं। नैनी झील के बारे में माना जाता है कि जब शिव सती की मृत देह को लेकर कैलाश पर्वत जा रहे थे, तब जहाॅं जहाॅं उनके शरीर के अंग गिरे वहाॅं वहाॅं शक्तिपीठों की स्थापना हुई। नैनी झील के स्थान पर देवी सती की बांयी ऑख (नैन या नयन) गिरी थी, जिस कारण इसे नयन ताल, नयनी ताल व कालान्तर में नैनीताल कहा गया। इसी से प्रेरित होकर इस मन्दिर की स्थापना की गई।

मन्दिर के अन्दर नैना देवी के साथ गणेश जी और माॅं काली की भी मूर्तियां हैं। मन्दिर के प्रवेश द्वार पर पीपल का एक वृक्ष है। ऐसा माना जाता है कि माता के दर्शन मात्र से ही लोगों को नेत्र रोग की पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है। माॅं नयना देवी मन्दिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह मन्दिर नेपाल की पैगोड़ा और गौथिक शैली का समावेश है। नैनीताल में बोट हाउस क्लब और पंत पार्क के निकट स्थापित मन्दिर सन् 1880 में आये भयंकर भूस्खलन से ध्वस्त हो गया था। उसके बाद माॅं नैना देवी ने नगर के प्रमुख व्यवसायी मोलाल शाह के पुत्र अमर नाथ शाह को स्वप्न में उस स्थान का पता बताया जहाॅं मूर्ति दबी पड़ी थी। अमर नाथ शाह ने नये सिरे से मन्दिर का निर्माण करवाया और मूर्ति स्थापित करवाई।

मन्दिर के अलावा यहाॅं का मल्लीताल और तल्लीताल पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। इन दोनोे तालों को जोड़ने वाली सड़क माल रोड कहलाती है। आसपास घूमने के लिये भीमताल, नौकुचिया ताल, भवाली, घोड़खाल, सातताल, मुक्तेश्वर, कैंचीधाम, रामगढ़ और रानीखेत जैसे कई दर्शनीय जगह मौजूद हैं।

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